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Showing posts with the label 10जुलाई

सत्यदेव दुबे

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#13july  #25dic  सत्यदेव दुबे 🎂13 जुलाई 1936 बिलासपुर , मध्य प्रांत और बरार , ब्रिटिश भारत वर्तमान छत्तीसगढ़ , भारत  ⚰️मृत्यु 25 दिसंबर, 2011 मृत्यु स्थान मुम्बई, महाराष्ट्र कर्म भूमि मुम्बई कर्म-क्षेत्र नाटककार, पटकथा लेखक, फ़िल्म व नाट्य निर्देशक मुख्य फ़िल्में अंकुर, निशांत, भूमिका, कलयुग, जुनून, मंडी आदि पुरस्कार-उपाधि संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1971), राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ पटकथा (1978), फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ संवाद पुरस्कार (1980), पद्म भूषण (2011) नागरिकता भारतीय अन्य जानकारी सत्यदेव ने कुछ फ़िल्मों में अभिनय भी किया और कुछ फ़िल्मों का निर्देशन भी किया है। सत्यदेव दुबे का जन्म छत्तीसगढ़ के शहर बिलासपुर में 1936 में हुआ था। शुरुआती दिनों में दुबे जी की क्रिकेट के प्रति दीवानगी थी और वे एक नामी क्रिकेटर बनना चाहते थे और अपने सपनों को पूरा करने के लिए मुंबई चले आए थे लेकिन शौकिया तौर पर भारतीय रंगमंच के पितामह कहलाने वाले इब्राहीम अल्काजी द्वारा संचालित थिएटर के संपर्क में आने से उनकी ज़िंदगी बदल गई। पी डी शिनॉय और निखिलजी का मार्गदर्शन रहा। अल्काजी ...

परवीन सुल्ताना

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#10july  परवीन सुल्ताना 10 जुलाई 1950  पुरानिगुदम पति: दिलशाद ख़ान (विवा. 1975) बच्चे: शादाब सुल्ताना खान इनाम: पद्म भूषण, ज़्यादा माता-पिता: Janab ikramul Majid, मरूफा माजिद बेगम परवीन सुल्ताना ने अन्य लोगों के अलावा आचार्य चिन्मय लाहिड़ी से भी प्रशिक्षण प्राप्त किया। बेगम परवीन सुल्ताना ने अपने पेशेवर करियर की शुरुआत अब्दुल मजीद की असमिया फिल्म मोरोम तृष्णा से की थी। उन्होंने गदर , कुदरत , दो बूंद पानी और पाकीजा जैसी बॉलीवुड फिल्मों और कई अन्य असमिया फिल्मों के लिए गायन किया है। हाल ही में उन्होंने विक्रम भट्ट की फिल्म 1920 का थीम गीत गाया । उन्होंने 1981 में फ़िल्म कुदरत के लिए हमें तुमसे प्यार कितना गाना भी गाया। उन्होंने एचएमवी , पॉलीडोर , म्यूजिक इंडिया, भारत रिकॉर्ड्स, औविडिस, मैग्नासाउंड, सोनोडिस्क और अमिगो के लिए रिकॉर्डिंग की है। बेगम परवीन सुल्ताना के साथ अक्सर पंडित श्रीनिवास आचार्य हारमोनियम पर संगत करते हैं। उनकी शादी उस्ताद दिलशाद खान से हुई है जिनसे उन्होंने संगीत की शिक्षा भी ली है। उनकी एक बेटी है जिसका नाम शादाब खान है। 🎥 परवीन सुल्ताना ने वर्षो...

मंजरी फडनीस

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#10july  मंजरी फडनीस  10 जुलाई 1988 ,मुंबई, (जिन्हें फडनीस और फडनिस भी लिखा जाता है ;  10 जुलाई 1988, मुंबई, भारत) एक भारतीय अभिनेत्री हैं जो मुख्य रूप से हिंदी फिल्मों के अलावा कुछ अन्य भाषा की फिल्मों में दिखाई देती हैं।  वह 2008 की हिंदी फिल्म जाने तू...या जाने ना में अपने प्रदर्शन के लिए जानी जाती हैं ।  उनकी अन्य उल्लेखनीय फिल्में हैं फालतू (2006),  ज़ोकोमोन (2011),  वार्निंग (2013),  ग्रैंड मस्ती (2013),  किस किस को प्यार करूं (2015),  एक लघु फिल्म खमाखा (2016)  और ' बरोट हाउस ' (2019)। महाराष्ट्रीयन परिवार से ताल्लुक रखने वाली मंजरी का जन्म सागर, मध्य प्रदेश में रुचि फडनीस और कर्नल भरत कुमार फडनीस के घर हुआ था। चूंकि उनके पिता भारतीय सेना में कार्यरत थे, जो एक स्थानांतरणीय सेवा थी, इसलिए वह अपने इकलौते भाई गगन फडनीस के साथ शिमला, जम्मू, दिल्ली, मुंबई और पुणे (अपने गृहनगर) में पली-बढ़ीं। 🎥 2004 रोक साको से रोक लो पहली हिंदी फिल्म 2006 फालतू बंगाली 2007 मुंबई साल्सा 2008  जाने तू... हां जाने ना  सिद्दू, स...

आलोक नाथ

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#10july आलोक नाथ 🎂10 जुलाई 1956 खगड़िया बच्चे: शिवांग नाथ पत्नी: आशु सिंह (विवा. 1987) बहन: विनीता मलिक एक भारतीय फिल्म अभिनेता और टीवी कलाकार हैं। जो मुख्यतः हिंदी फिल्मों में नजर आते हैं। उन्हें हिंदी सिनेमा में 'बाबूजी' के नाम से भी जाना जाता हैं। आलोक नाथ का जन्म 10 जुलाई 1956 को पटना बिहार में हुआ था। अलोक नाथ ने अपने करियर की शुरुआत साल 1982 में  फिल्म गाँधी से की थी। उन्होंने हिंदी सिनेमा में हर तरह की भूमिका अदा की। उन्हें सूरज बड़जात्या और राजश्री प्रोडक्शन की फिल्मों में अच्छे पिता का किरदार निभाने से हिंदी सिनेमा में बेहद प्रसिद्धि मिली। जिस कारण दर्शक भी उन्हें बाबूजी कहने से कोई गुरेज नहीं करते। बड़े पर्दे पर ही नहीं छोटे पर्दे पर भी उन्होंने एक अच्छे पिता की भूमिका अदा की हैं ,जिनमे सीरियल बाबुल की विदाई, यंहा मैं घर-घर खेली जैसे शो शामिल हैं। प्रसिद्ध फिल्में गांधी , मशाल, हम साथ साथ हैं, कच्ची कली, पेट प्यार और पाप, जेवर,ये वो मंजिल तो नहीं, कयामत से कयामत तक, मोहरे, हम आपके हैं कौन, अग्नि, जोशीले, कसम सुहाग की, अनजाने रिश्ते, मैंने प्यार ...

प्रेम वैद

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#10july #26feb  प्रेम वैद्य  🎂जन्म 26 फरवरी, 1927 ⚰️10 जुलाई 2014  वह एक निर्देशक, छायाकार, पटकथा लेखक और निर्माता थे।  प्रेम वैद्य का जन्म 26 फरवरी, 1927 को हुआ था। वे एक निर्देशक, छायाकार, पटकथा लेखक और निर्माता थे। उनकी पुरस्कार विजेता कृतियों में स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर पर आधारित जीवनी पर आधारित वृत्तचित्र वीर सावरकर शामिल है। 1954 में, वे सहायक छायाकार के रूप में भारत सरकार के फिल्म प्रभाग का हिस्सा बन गए। इसके अलावा, प्रेम वैद्य ने काला पानी: ए पिलग्रिमेज, वीर सावरकर, नीलम संजीव रेड्डी: प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया, गो स्लो, रिदम्स ऑफ ए न्यू लाइफ आदि जैसी फिल्मों का निर्देशन भी किया है। निर्देशन के अलावा वे एक अच्छे लेखक भी थे। उन्होंने अंग्रेजी, हिंदी और मराठी में समाचार पत्रों और अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं के लिए कई लेख लिखे। मूविंग इमेजेस पर यादगार असाइनमेंट और सावरकर ए लाइफ़लॉन्ग क्रूसेडर को क्रमशः नेशनल फ़िल्म आर्काइव ऑफ़ इंडिया और न्यू एज इंटरनेशनल पब्लिशर्स द्वारा प्रकाशित किया गया था। प्रेम वैद्य को 2003 में भारतीय डॉक्यूमेंट्री प्रोड्य...

भिखारी ठाकुर

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भोजपुरी के शेक्सपीयर कवि, गीतकार,नाटककार, नाट्य निर्देशक, लोक संगीतकार और अभिनेता भिखारी ठाकुर 🎂18 दिसंबर 1887, छपरा ⚰️ 10 जुलाई 1971 किताबें: Ganga Asnan फ़िल्में: बिदेसिया माता-पिता: शिवकली देवी, दल सिंगार ठाकुर भाषा: भोजपुरी भिखारी ठाकुर भोजपुरी के समर्थ लोक कलाकार, रंगकर्मी लोक जागरण के सन्देश वाहक, नारी विमर्श एवं दलित विमर्श के उद्घोषक, लोक गीत तथा भजन कीर्तन के अनन्य साधक थे।भिखारी ठाकुर बहुआयामी प्रतिभा के व्यक्ति थे। वे एक ही साथ कवि,गीतकार, नाटककार, नाट्य निर्देशक, लोक संगीतकार और अभिनेता थे। भिखारी ठाकुर की मातृभाषा भोजपुरी थी और उन्होंने भोजपुरी को ही अपने काव्य और नाटक की भाषा बनाया। राहुल सांकृत्यायन ने उनको 'अनगढ़ हीरा' कहा था तो जगदीशचंद्र माथुर ने 'भरत मुनि की परंपरा का कलाकार'। उनको भोजपुरी का शेक्सपीयर'भी कहा गया। भिखारी ठाकुर का जन्म 18 दिसम्बर, 1887 के बिहार के सारन ज़िले के कुतुबपुर (दियारा) गाँव में एक नाई परिवार में हुआ था। उनके पिताजी का नाम दल सिंगार ठाकुर व माताजी का नाम शिवकली देवी था। भिखारी ठाकुर का रचनात्मक संसार बेहद सरल ह...

परवीन सुल्ताना

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#10july  परवीन सुल्ताना 🎂10 जुलाई 1950   पुरानिगुदम पति: दिलशाद ख़ान (विवा. 1975) बच्चे: शादाब सुल्ताना खान इनाम: पद्म भूषण, ज़्यादा माता-पिता: Janab ikramul Majid, मरूफा माजिद महान शास्त्रीय  एवम् पार्श्व गायिका परवीन सुल्ताना भारत की प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका हैं। वह 'पटियाला घराने ' से सम्बन्धित हैं।परवीन सुल्ताना ऐसी विलक्षण प्रतिभाशाली गायिका हैं, जिन्हें वर्ष 1976 में 'पद्मश्री ' से सम्मानित किया गया था। असमिया पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाली परवीन सुल्ताना ने पटियाला घराने की गायकी में अपना अलग मुकाम बनाया है। उनके परिवार में कई पीढ़ियों से शास्त्रीय संगीत की परम्परा रही है। उनके गुरुओं में 'आचार्य चिनमोय लाहिरी' और 'उस्ताद दिलशाद ख़ान' प्रमुख रहे हैं। गीत को अपनी अन्तरात्मा मानने वाली परवीन सुल्ताना की जन्म-भूमि असम और कर्म-भूमि मुम्बई रही है। परवीन सुल्ताना का जन्म 10 जुलाई, 1950 को नोगोंग ग्राम, असम में हुआ था। इनके पिता का नाम 'इकरामुल माजिद' तथा माता का नाम 'मारूफ़ा माजिद' था। परवीन सुल्ताना ने सबसे पहले संगीत अप...

असद भोपाली

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#10july  #09jun  असद भोपाली 🎂10 जुलाई 1921, भोपाल ⚰️ 09 जून 1990, मुम्बई माता-पिता: मुंशी अहमद खान इनाम: फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार - सर्वश्रेष्ठ गीतकार हिंदी सिनेमा के गीतकार और शायर थे। उन्हें ऐसे गीतकार में शुमार किया जाता है, जिन्होंने फ़िल्म इंडस्ट्री में 40 साल तक का लंबा संघर्ष किया। उन्हें फ़िल्म 'मैंने प्यार किया' के लिए लिखे गीत 'कबूतर जा जा जा' के लिए प्रतिष्ठित फ़िल्मफेयर पुरस्कार मिला। जीवन_परिचय असद भोपाली का जन्म 10 जुलाई, 1921 को भोपाल के इतवारा इलाके में पैदा हुए थे। उनका वास्तविक नाम असदुल्लाह ख़ान था। उनके पिता मुंशी अहमद खाँ भोपाल के आदरणीय व्यक्तियों में शुमार थे। वे एक शिक्षक थे और बच्चों को अरबी-फारसी पढ़ाया करते थे। पूर्व राष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा भी उनके शिष्यों में से एक थे। वो घर में ही बच्चों को पढ़ाया करते थे, इसीलिए असद भी अरबी-फारसी के साथ-साथ उर्दू में भी महारत हासिल कर पाए, जो उनकी शायरी और गीतों में हमेशा झलकती रही। 1940 के अंतिम दौर में मशहूर फ़िल्म निर्माता फजली ब्रदर्स 'दुनिया' नामक फ़िल्म बना रहे थे। फ़िल्म के गीत म...

जोहरा सहगल

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           " जोहरा सहगल". #10july  #27april  ज़ोहरा सहगल 🎂 27 अप्रैल 1912, सहारनपुर ⚰️ 10 जुलाई 2014, नई दिल्ली पति: कामेश्वर सहगल (विवा. 1942–1959) बच्चे: किरण सहगल, पवन सहगल माता-पिता: नतीक़ा बेगम, मुमताज़उल्लाह ख़ान पोते या नाती: अनुष्का सेगल, तामरा सेगल, रोहन सेगल ज़ोहरा सहगल हिन्दी फ़िल्मों की एक अभिनेत्री थीं। ज़ोहरा सहगल का असली नाम साहिबज़ादी ज़ोहरा बेगम मुमताज़ उल्लाह खान था।उनका जन्म एक सुन्नी मुस्लिम परिवार में हुआ था। महज सात वर्ष की आयु में मोतियाबिंद ने उनकी बायीं आँख की रौशनी छीन ली। उनका स्वभाव विद्रोही था। देहरादून में आयोजित मशहूर नृत्यांगना उदय शंकर के नृत्य ने उन्हें प्रेरणा दी। अलग-अलग संस्कृतियों और रीति-रिवाज़ों में उनकी बहुत रुचि थी। स्नातक होने के पश्चात वे उदय शंकर की नृत्य-मंडली में सम्मिलित हो गईं और जगह-जगह यात्रा की। अपनी इसी यात्रा के दौरान उन्होंने अपने से आठ वर्ष छोटे कामेश्वर सहगल से प्रेम-विवाह किया। 🎥 2007 चीनी कम  2007 साँवरिया  2005 द मिस्ट्रेस ऑफ स्पाइसेज़  2004 कौन है जो सपनों में ...