मनोज कुमार

#24july 
मनोज कुमार
 🎂24 जुलाई, 1937
जन्म भूमि अबोटाबाद (अब पाकिस्तान)
हरिकिशन गिरि गोस्वामी
प्रसिद्ध नाम मनोज कुमार
अन्य नाम भारत कुमार
पति/पत्नी शशी गोस्वामी
कर्म भूमि मुम्बई
कर्म-क्षेत्र फ़िल्म अभिनेता, निर्माता व निर्देशक
मुख्य फ़िल्में शहीद, उपकार, पूरब और पश्चिम, क्रांति, रोटी कपड़ा और मकान, हिमालय की गोद में, हरियाली और रास्ता, पत्थर के सनम, नीलकमल आदि।
शिक्षा स्नातक
विद्यालय हिन्दू कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय
पुरस्कार-उपाधि दादा साहब फाल्के पुरस्कार, पद्मश्री, फालके रत्न पुरस्कार, लाइफ़ टाइम अचीवमेंट फ़िल्मफेयर पुरस्कार
विशेष योगदान अपनी फ़िल्मों के जरिए मनोज कुमार ने लोगों को देशभक्ति की भावना का गहराई से एहसास कराया।
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी देशभक्ति की फ़िल्में बनाने के कारण इनका नाम 'भारत कुमार' पड़ा
निर्देशक
शहीद के दो साल बाद उन्होंने बतौर निर्देशक अपनी पहली फ़िल्म 'उपकार' का निर्माण किया। उसमें मनोज ने भारत नाम के किसान युवक का किरदार निभाया था जो परिस्थितिवश गांव की पगडंडियाँ छोड़कर मैदान-ए-जंग का सिपाही बन जाता है। जय जवान जय किसान के नारे पर आधारित वह फ़िल्म उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के विशेष आग्रह पर बनाई थी। उस फ़िल्म में गांव के आदमी के शहर की तरफ भागने, फिर वापस लौटने और उससे जुड़े सामाजिक रिश्तों की कहानी थी जिसमें उस वक्त के हालात को ज़्यादा से ज़्यादा समेटने की कोशिश की गई थी।
उपकार खूब सराही गई और उसे सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म, सर्वश्रेष्ठ निर्देशक, सर्वश्रेष्ठ कथा और सर्वश्रेष्ठ संवाद श्रेणी में फ़िल्मफेयर पुरस्कार मिला था। फ़िल्म को द्वितीय सर्वश्रेष्ठ फ़ीचर फ़िल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार तथा सर्वश्रेष्ठ संवाद का बीएफजेए अवार्ड भी दिया गया।

फ़िल्म शहीद
मनोज को शहीद के लिए सर्वश्रेष्ठ कहानीकार का राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया था। मनोज कुमार ने शहीद फ़िल्म में सरदार भगत सिंह की भूमिका को जी कर उस किरदार के फ़िल्मी रूपांतरण को भी अमर बना दिया था।

फिल्मी सफर

मनोज कुमार दिलीप कुमार से बेहद प्रभावित थे और उन्होंने अपना नाम फ़िल्म शबनम में दिलीप के किरदार के नाम पर मनोज रख लिया था। मनोज कुमार ने वर्ष 1957 में बनी फ़िल्म फ़ैशन के जरिए बड़े पर्दे पर क़दम रखा। प्रमुख भूमिका की उनकी पहली फ़िल्म कांच की गुडि़या (1960) थी। उसके बाद उनकी दो और फ़िल्में पिया मिलन की आस और रेशमी रुमाल आई लेकिन उनकी पहली हिट फ़िल्म हरियाली और रास्ता (1962) थी। मनोज कुमार ने वो कौन थी, हिमालय की गोद में, गुमनाम, दो बदन, पत्थर के सनम, यादगार, शोर, संन्यासी, दस नम्बरी और क्लर्क जैसी अच्छी फ़िल्मों में काम किया। उनकी आखिरी फ़िल्म मैदान-ए-जंग (1995) थी। बतौर निर्देशक उन्होंने अपनी अंतिम फ़िल्म ‘जय हिंद’ 1999 में बनाई थी।

प्रसिद्धि


मनोज कुमार अपनी देशभक्तिपूर्ण फ़िल्मों की वजह से जाने जाते हैं। उन्होंने अपनी फ़िल्मों में भारतीयता की खोज की। उन्होंने दर्शकों को देशप्रेम और देशभक्ति के बारे में बताया। उन्होंने आँसूतोड़ फ़िल्में बनाईं और मुनाफे से ज़्यादा अपना नाम कमाया जिसके कारण वे भारत कुमार कहलाए। फ़िल्म जगत् में मनोज कुमार अपनी देशभक्तिपूर्ण फ़िल्मों के कारण जाने जाते हैं, अपने अभिनय के कारण नहीं।
🎥
प्रसिद्ध फिल्मे
1995 मैदान-ए-जंग 
1989 क्लर्क 
1989 देशवासी 
1989 संतोष 
1987 कलयुग और रामायण 
1981 क्रांति 
1979 जाट पंजाबी 
1977 शिरडी के साईं बाबा 
1977 अमानत 
1976 दस नम्बरी 
1975 सन्यासी 
1974 रोटी कपड़ा और मकान 
1972 बेईमान 
1972 शोर 
1970 मेरा नाम जोकर 
1970 पूरब और पश्चिम 
1970 यादगार 
1970 पहचान 
1969 साजन 
1968 नीलकमल 
1968 आदमी 
1967 अनीता 
1967 उपकार 
1967 पत्थर के सनम 
1966 दो बदन 
1966 पिकनिक 
1966 सावन की घटा 
1965 हिमालय की गोद में 
1965 पूनम की रात 
1965 शहीद 
1965 बेदाग 
1965 गुमनाम 
1964 वो कौन थी 
1964 अपने हुए पराये 
1964 फूलों की सेज 
1963 घर बसा के देखो 
1963 गृहस्थी 
1962 हरियाली और रास्ता 
1962 माँ बेटा 
1962 अपना बना के देखो 
1962 बनारसी ठग 
1962 डॉक्टर विद्या 
1962 नकली नवाब 
1962 शादी 
1961 सुहाग सिन्दूर 
1961 काँच की गुड़िया 
1961 रेशमी रूमाल 
1960 हनीमून 
1958 पंचायत 
1958 सहारा 
1957 फैशन 
बतौर लेखक

1999 जय हिन्द 
1989 क्लर्क 
1987 कलयुग और रामायण 
1981 क्रांति 
1974 रोटी कपड़ा और मकान 
1972 शोर 
1970 मेरा नाम जोकर 
1970 पूरब और पश्चिम 
1970 यादगार 
1967 उपकार 
बतौर निर्माता
संपादित करें
वर्ष फ़िल्म टिप्पणी
1999 जय हिन्द 
1989 क्लर्क 
1983 पेंटर बाबू 
1981 क्रांति 
1974 रोटी कपड़ा और मकान 
1972 शोर 
1970 पूरब और पश्चिम 
बतौर निर्देशक

1999 जय हिन्द 
1989 क्लर्क 
1981 क्रांति 
1974 रोटी कपड़ा और मकान 
1972 शोर 
1970 पूरब और पश्चिम 
1967 उपकार

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