कैलाश खेर
#07july
कैलाश खेर
🎂07 जुलाई 1973
, मेरठ
पत्नी: शीतल (विवा. 2009)
माता-पिता: चंद्रकांता मेहर सिंह खेर, पंडित मेहर सिंह खेर
बच्चे: कबीर खेर
कैलाश खेर को संगीत मानों विरासत में मिली हो। उनके पिता पंडित मेहर सिंह खेर पुजारी थे और अक्सर घरों में होने वाले इवेंट में ट्रेडिशनल फोक सॉन्ग गाया करते थे। कैलाश ने बचपन में पिता से ही संगीत की शिक्षा ले ली थी। लेकिन वह कभी भी बॉलीवुड गाने सुनना पसंद नहीं करते थे और ना ही सुना करते थे पर उनको संगीत से लगाव तो काफी था।
संगीत सीखने के लिए घर से की बगावत
कैलाश जब 13 साल के थे तभी वो संगीत की बेहतर शिक्षा लेने के लिए घरवालों से लड़कर दिल्ली आ गए थे। यहां आकर उन्होंने संगीत की शिक्षा तो लेनी शुरू कर दी लेकिन साथ में पैसे कमाने के लिए छोटा सा काम शुरू कर दिया। साथ में विदेशी लोगों को संगीत भी सिखाकर पैसे कमाते थे।
बिजनेस में घाटे के करना चाहते थे सुसाइड
दिल्ली में रहते हुए 1999 तक कैलाश खेर ने अपने एक फैमिली फ्रेंड के साथ एक्सपोर्ट का बिजनेस करने लगे थे। इसी साल उन्हें इस कारोबार में इतना बड़ा घाटा हुआ जिसमें वह अपनी सारी जमा पूंजी गंवा चुके थे। इसी वक्त कैलाश इतने डिप्रेशन में चले गए थे कि वो जिंदगी से तंग आकर सुसाइड करना चाहते थे। इन सब से किसी तरह से निकलने के बाद कैलाश पैसे कमाने के लिए सिंगापुर और थाइलैंड चले गए। जहां 6 महीने रहने के बाद वो वापस भारत आकर ऋषिकेश चले गए और कुछ दिनों तक वहीं रहे। वहां वे साधू-संतो के लिए गाना गाया करते थे। कैलाश के गाने को सुनकर बड़ा से बड़ा संत झूम उठता था, इससे कैलाश का खोया विश्वास वापस आया और वह मुंबई चले गए।
मुंबई आने के बाद कैलाश ने काफी गरीबी में दिन गुजारें। घर में नहीं बल्कि कैलाश वहां चॉल में रहते थे। उनके हालत कैसे थे वो इसी बात से पता चलता है कि उनके पास पहनने के लिए एक सही चप्पल भी नहीं थी। वह एक टूटी चप्पल ले 24 घंटे स्टूडियो के चक्कर लगाते रहते ताकि कोई तो उनकी आवाज को सुन उनको गाने का मौका दे दे।
एक दिन उन्हें राम संपत ने एक ऐड का जिंगल गाने के लिए बुलाया, जिसके लिए उन्हें 5000 रुपए मिले। तब पांच हजार रुपए भी कैलाश को बहुत ज्यादा लगे और इनसे उनका कुछ दिन का काम चल गया। 'अल्ला के बंदे हम' ने दिलाई एक अलग पहचान दिलाई।
कैलाश ने मुंबई में कई सालों तक स्ट्रगल करने के बाद फिल्म अंदाज से उन्हें ब्रेक मिला। इस फिल्म में कैलाश ने 'रब्बा इश्क ना होवे' में अपनी आवाज दी। लेकिन कैलाश के किस्मत का तारा तब चमका जब उन्होंने फिल्म वैसा भी होता है में 'अल्ला के बंदे हम' गाने में अपनी आवाज दी। ये गाना आजतक कैलाश के हिट गानों में से एक है।
18 भाषाओं में गया गाना
कैलाश खेर ने अबतक 18 भाषाओं में गाने गा चुके हैं। 300 से अधिक गाने कैलाश ने सिर्फ बॉलीवुड में गाए हैं। कैलाश को अपने गानों के लिए दर्जनों अवार्ड मिल चुके हैं। कैलाश खेर 2009 में मुंबई बेस्ड शीतल से शादी की। उनका एक चार साल का बेटा है, जिसका नाम कबीर है।
कैलाश खेर एक भारतीय पॉप-रॉक गायक है जिनकी शैली भारतीय लोक संगीत से प्रभावित है। कैलाश खेर ने अबतक 18 भाषाओं में गाने गाया हैं और 300 से अधिक गीत बॉलीवुड में गाये है।
पृष्ठभूमि
कैलाश खेर का जन्म कश्मीरी पंडित परिवार में मेरठ (उत्तर-प्रदेश) में हुआ था।
पढ़ाई
कैलाश खेर ने अपनी शुरुआती पढाई दिल्ली से पूरी की है। कैलाश को बचपन से ही गाने का शौक था, जब वह महज बारह वर्ष के थे, तभी से उन्होंने शास्त्रीय संगीत की शिक्षा लेनी आरम्भ कर दी थी, उन्होंने संगीत में अपना करियर बनाने के लिए पाकिस्तानी सूफी गायक नुसरत फ़तेह अली खान से प्रेरणा मिली।
शादी
कैलाश खेर की शादी शीतल खेर से सम्पन्न हुई है।
करियर
कैलाश खेर को अपनी शुरुआती बॉलीवुड करियर में बेहद संघर्ष करना पड़ना। उन्हें हिंदी सिनेमा में पहचान अक्षय कुमार और प्रियंका चोपड़ा स्टारर फिल्म अंदाज से मिली। इस फिल्म में उन्होंने गाने 'रब्बा इश्क ना होवे' में आवाज दी, जो उस दौर का सबसे सुपरहिट और चार्टबस्टर गाना साबित हुआ था। इसके बाद उन्होंने फिल्म वैसा भी होता है में 'अल्ला के बंदे हम' गाने में आवाज दी, जो उनका अबतक का सबसे प्रसिद्ध और हिट सोंग है। इन दोनों हिट गानों के कैलाश बॉलीवुड के मशहूर गायकों की फेहरिस्त में शामिल हो गये।
कैलाश खेर हिंदी सिनेमा में सूफी गानों के लिए जाने जाते हैं। मल्टीस्टारर फिल्म सलामे इश्क में उन्होंने या रब्बा गाने में अपनी आवाज दी। यह गाना उस दौर का सबसे हित गाना साबित हुआ था। उनकी गायकी का परचम सिर्फ हिंदी सिनेमा में ही नहीं बल्कि कन्नड़ और तेलुगु सिनेमा में भी लहरा रहा है।
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